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"आज, हम भारतीय अर्थव्यवस्था के मूल प्रेरक के रूप में उभरे हैं...", चेयरमैन
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सितम्बर 27, 2011

प्रिय साथियो,

इस माह का प्रारंभ उन परीक्षाओं और संकटों की स्मृतियों की याद दिलाता है जो इंडियनऑयल ने अपनी स्थापना के बाद अपने पांव जमाने में अनुभव किए। 1950 और 1960 के दशकों में नए आज़ाद भारत ने राष्ट्रों के सौहार्द में अपना स्थान बनाने के लिए संघर्ष किया, हमारे पथप्रदर्शक ने देशवासियों की आकांक्षाओं को पूरा करने का दायित्व लिया। शीघ्र ही टैंकर आयातित क्रूड और उत्पाद ले जाने के लिए हमारे पत्तनों पर खड़े हुए, देश के आर-पार आपूर्ति लाइनें बिछाई गईं, रिफ़ाइनरी कॉलम ऊपर उठे और गुवाहाटी, बरौनी, गुजरात और हल्दिया में रूपरेखा बदल गई। इंडियनऑयल के लोगों ने देशवासियों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए दिन-रात कड़ा परिश्रम किया। दशकों से हमने इस महान संगठन को बड़ी मेहनत से बनाया, यह सचमुच इंडियनऑयल की अदम्य भावना ही थी जो उभरते हुए राष्ट्र की ऊर्जा जीवनरेखा बनने के लिए हमारे संकल्प से प्रदीप्त हुई।

आज, हम भारतीय अर्थव्यवस्था के मूल प्रेरक के रूप में उभरे हैं और विश्व के वैश्विक रूप से प्रशंसित फॉर्च्यून 100 संगठनों में से हैं। तथापि यह सफ़र आसान नहीं रहा है।

आरंभ से ही हमने ज़बरदस्त चुनौतियों का सामना करके उन्हें पार किया है। मिसाल के तौर पर किस तरह पहली सरकारी क्षेत्र की रिफ़ाइनरी आबोहवा और बुनियादी ढांचा संबंधी प्रतिकूलताओं के बावजूद जनवरी 1962 में गुवाहाटी में अस्तित्व में आई, यह इंडियनऑयल के ज्ञान का हिस्सा था। पेट्रोलियम उत्पादों के विपणन में भी उस समय बाज़ार में बर्मा शेल, एक्कसान, कालटेक्स का प्रभुत्व था। इंडियनऑयल ने डीज़ल का 11,390 टन का पहला कार्गो रूस से आयात किया जो मुंबई में 17 अगस्त 1960 को प्राप्त किया गया। उस समय हमारे प्रवेश से बहुराष्ट्रीय कंपनियों को परिवहन ईंधनों की कीमत कम करने के लिए बाध्य होना पड़ा। हमारा पहला ब्रांड - इंडेन एलपीजी 1972 में पंजीकृत हुआ और भारत में सबसे अधिक धमाकेदार ब्रांड साबित हुआ।

इस समय हमने अपनी अधुनातन गौण संसाधन क्षमता निर्मित की है जिससे आसुत प्राप्ति 35-40: से बढ़कर 75: से ऊपर चली गई है। वर्ष़ों से हमने पूरे देश में विपणन व पाइपलाइन बुनियादी ढांचे का भी विस्तार किया है और अन्य महत्वपूर्ण कारोबार क्षेत्रों - पेट्रोकेमिकल व गैस में प्रवेश किया है।

अतीत अच्छा रहा है। अब हमारे सामने सवाल यह है कि सफलतापूर्वक किस तरह सुधार लाया जाए और भविष्य में हमसे क्या आशाएं हैं। मैं अपने साथियों के साथ यह बात साझा करता रहा हूँ कि इंडियनऑयल के लिए सबसे बड़ी चुनौती नियंत्रणमुक्त परिदृश्य, पूरी तरह प्रतिस्पर्द्धी परिदृश्य के लिए स्वयं को तैयार करना है।

प्रतिस्पर्द्धा इंडियनऑयल के लिए नई नहीं है, हमने अतीत में देखा है, जब हम स्थापित हुए थे। इंडियनऑयल प्रतिस्पर्द्धा के लिए ही पैदा हुआ था और प्रतिस्पर्द्धी भावना हमारी रगों में बसी हुई है। किंतु, ग्राहक राजा है और मैं इस बात पर ज़ोर देता रहा हूँ कि जब तक हम ग्राहक का ध्यान नहीं रखेंगे तब तक हम सफल नहीं होंगे। हमें अपनी टीम के उन सदस्यों पर फ़ोकस करने की ज़रूरत है जो ग्राहकों के साथ हमारे संपर्कबिंदु हैं - चाहे वे हमारे फ्रंटलाइन अधिकारी हों अथवा पंप अटेंडेंट, जो उनके साथ बातचीत करते हैं। हमें उनका ध्यान रखने की ज़रूरत है जो बदले में हमारे ग्राहकों का ध्यान रखेंगे और जो बाज़ार में हमें आगे रखेगा।

अन्य महत्वपूर्ण बात फ़ोकस में रखने की यह है कि कम लागत पर बने रहना। निश्चित है कि हमारे पास सभी अंतर्देशीय रिफ़ाइनरियां हैं, इसलिए पारादीप में आ रही रिफाइनरी का महत्व है। मैं महसूस करता हूँ कि हम पश्चिमी क्षेत्र में कॉम्प्लेक्स रिफ़ाइनरी स्थापित करने पर विचार कर सकते हैं जो लगभग 2018-19 में चालू होगी। इससे हम न केवल सबसे भारी क्रूड प्रोसेस करने में समर्थ होंगे बल्कि प्रतिस्पर्द्धी दरों पर क्रूड आयात करने और अधिशेष उत्पाद निर्यात करने में भी समर्थ होंगे। पेट्रोकेमिकल्स में रचना खंड स्थापित करने के बाद ऊंचे मार्जिन वाले विशिष्ट उत्पादों तक पहुँचने की ज़रूरत है तकि हम अपने पेट्रोकेमिकल कारोबार को मुनाफे वाला बनाने के लिए मूल्य योजित कर सकें। भारत 2040-50 तक विश्व की शीर्षस्थ चार सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक अर्थव्यवस्था बनने के लिए तैयार है। हम जल्द ही ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे शहरी क्षेत्रों को विकास का प्रेरक बनता हुआ देखेंगे और हमें उनके साथ हर समय बने रहने की ज़रूरत है।

ये ऐसे कुछ क्षेत्र हैं जिन पर हम अन्वेषण व उत्पादन में विशेषज्ञता पर ज़ोर देने, मूल कारोबार वर्टिकलों और गैस में अपनी स्थिति के समेकन के अलावा कार्य कर रहे हैं। यह हमारे पूर्व साथियों के प्रति सम्मान होगा जिन्होंने विभिन्न प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद इस कंपनी की नींव रखी।

हम इंडियनऑयल को ऊंची बुलंदियों पर किस प्रकार ले जा सकते हैं,इस बारे में आप अपने विचारों के संबंध में मिमकइंबा2बींपतउंद/पवबसण्बवण्पद पर मुझे अवश्य लिखें।

(उपर्युक्त इंडियनऑयल दिवस-2011 पर अध्यक्ष द्वारा दिए गए भाषण का अंश है।)

आरएस बुटोला
अध्यक्ष

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